THINK. ACT. CHANGE.

Artharth

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आईने से चिढ़- पिछले महीने मध्य प्रदेश की विधानसभा के सदस्यों की एक बड़ी आजादी जाते-जाते बची. राज्य विधानसभा में सवाल पूछने के अधिकार सीमित किए जा रहे थे और माननीय [...]

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हंगामा है यूं बरपा- किस दूसरी पार्टी के पास होंगे इतने दलित सांसद और विधायक? आंबेडकर स्मारकों से लेकर राष्ट्रपति बनाने तक, दलित अस्मिता प्रतीकों को साधने में भाजपा ने क [...]

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सूबेदारों पर दारोमदारएक राजा था. उसके सिपहसालार धुरंधर थे. वे राजा के लिए जीत पर जीत लाते रहते थे. राजा नए सूबेदारों को जीते हुए सूबे सौंप कर अगली जंग में जुट जाता था.फिर [...]

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सबसे ज़हरीली जोड़ीफ्रिट्ज (नोबेल 1918) केमिस्ट्री का दीवाना था. वह यहूदी से ईसाई बन गया और शोध से बड़ी ख्याति अर्जित की. बीएएसएफ तब जर्मनी की सबसे बड़ी केमिकल (आज दुनिया [...]

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कमजोर करने वाली 'ताकत'सरकारनवंबर 2014: ''सरकार नियामकों की व्यवस्था को सुदृढ़ करेगी. वित्तीय क्षेत्र कानूनी सुधार आयोग (एफएसएलआरसी) की महत्वपूर्ण सिफारिशें सरकार क [...]

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अच्‍छे दिन ‘दिखाने’ की कल...

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पिछले दो-तीन वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था सचमुच गहरी मंदी का शिकार थी या हमारी पैमाइश ही गलत थी? अथवा नई सरकार ने सत्ता में आने के बाद पैमाइश का तरीका बदल दिया ताकि तस्वीर को बेहतर दिखाया जा सके? गनीमत है कि भारत में आम लोग आंकड़ों को नहीं समझते. राजनीति में कुछ भी कह कर बच निकलना संभव है और झूठ व सच को आंकड़ों में कसना टीवी बहसों का हिस्स [...]

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