THINK. ACT. CHANGE.

Artharth

- anshuman tiwari

दुनिया न मानेसंकेतों, अन्यर्थों और वाक्पटुताओं से सजी-संवरी विदेश नीति की कामयाबी को बताने किन आंकड़ों या तथ्यों का इस्‍तेमाल होना चाहिए ? यह चिरंतन सवाल ट्रंप और क [...]

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नई पहेलीगांव क्यों तप रहे हैं?किसान क्यों भड़के हैं?उनके गुस्से को किसी एक आंकड़े में बांधा जा सकता है?आंकड़ा पेश-ए-नजर हैः गांवों में मजदूरी की दर पिछले छह माह [...]

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सरकार बेशुमारदेश के हर बूथ पर हमारा कार्यकर्ता झंडा लेकर खड़ा रहेगा! हमारे कार्यकर्ता घर-घर तक पहुंचने चाहिए! पानी में आग लगा देने वाली इन राजनैतिक तैयारियों पर न् [...]

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... मुक्त भारत ! एच.डी. कुमारस्वामी की ताजपोशी के लिए बेंगलूरू में जुटे क्षत्रपों को यह समझने में लंबा वक्त लगा कि युद्ध प्रत्यक्ष शत्रु से लड़े जाते हैं, सियासत तो,  [...]

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नायाब नाकामी कथा सूत्र जीडीपी में 22 फीसदी का हिस्सा रखने वाला भारत का विशाल खुदरा व्यापार यानी रिटेल, खेती के बाद सबसे बड़ा रोजगार है. इसका आधुनिकीकरण तत्काल 5.6 [...]

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अच्‍छे दिन ‘दिखाने’ की कल...

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पिछले दो-तीन वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था सचमुच गहरी मंदी का शिकार थी या हमारी पैमाइश ही गलत थी? अथवा नई सरकार ने सत्ता में आने के बाद पैमाइश का तरीका बदल दिया ताकि तस्वीर को बेहतर दिखाया जा सके? गनीमत है कि भारत में आम लोग आंकड़ों को नहीं समझते. राजनीति में कुछ भी कह कर बच निकलना संभव है और झूठ व सच को आंकड़ों में कसना टीवी बहसों का हिस्स [...]

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