THINK. ACT. CHANGE.

Artharth

- anshuman tiwari

लुटाने निचोड़ने का लोकतंत्रनवंबर 2015 में सरकार के एक बड़े मंत्री पूरे देश में घूम-घूमकर बता रहे थे कि कैसे उनकी सरकार पिछली सरकारों के पाप ढो रही है. सरकारों ने सस्ती और मुफ्त ब [...]

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रुपए के राहु-केतुकोई कला नहीं चली सरकार की!रुपया इस बार गिरा तो गिरता चला गया,डॉलर के मुकाबले रुपया, 74 के करीब है. 75 रुपए वाले डॉलर की मंजिल दूर नहीं दिखती.कमजोरी शा [...]

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कर्ज पर कर्जक्या सरकारी बैंक ही बदकिस्मत हैं क्या वे ही  कर्ज के ढेर में दबे हैं ? तो फिर इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर लीजिंग एंड फाइनेंस लिमिटेड (आइएलऐंडएफएस) को क्या हुआ [...]

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नई मुख्यधारा!मानसरोवर में राहुल, इंदौर की बोहरा मस्जिद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुसलमानों के बिना हिंदुत्व की संकल्पना को खारिज करते राष्ट्रीय स्वयंसेवक सं [...]

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तेल निकालने की नीतिपेट्रोल-डीजल की कीमतों की आग आसमान छू रही है!छत्तीसगढ़ और राजस्थान में चुनावों से पहले सरकारी खर्च पर मोबाइल बांटे जा रहे हैं!अगर महंगे पेट्रोल-डीजल क [...]

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अच्‍छे दिन ‘दिखाने’ की कल...

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पिछले दो-तीन वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था सचमुच गहरी मंदी का शिकार थी या हमारी पैमाइश ही गलत थी? अथवा नई सरकार ने सत्ता में आने के बाद पैमाइश का तरीका बदल दिया ताकि तस्वीर को बेहतर दिखाया जा सके? गनीमत है कि भारत में आम लोग आंकड़ों को नहीं समझते. राजनीति में कुछ भी कह कर बच निकलना संभव है और झूठ व सच को आंकड़ों में कसना टीवी बहसों का हिस्स [...]

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