THINK. ACT. CHANGE.

Artharth

- anshuman tiwari

जीएसटी का इलाजयदि कोई बंदर कंप्यूटर के की बोर्ड को लंबे वक्त तक लगातार मनचाहे ढंग से पीटता रहे तो वह कभी न कभी अक्षरों का ऐसा पैटर्न बना लेगा जो शेक्सपियर की कविता [...]

- anshuman tiwari

खर्च करेंगे तो बचेंगेहम सरकार से सहमत या असहमत हो सकते हैं लेकिन अर्थव्यवस्था में ढलान से तो गाफिल नहीं होंगे.माना कि सरकार ने टैक्स (जीएसटी) थोपने में कोई मुरव्वत नहीं की [...]

- anshuman tiwari

हस्ती कायम रहे हमारीशंख और लिखित परम तपस्वी ऋषि थे. दोनों सगे भाई. एक दिन लिखित, शंख के आश्रम पर पहुंचे. शंख कहीं गए हुए थे. भूखे लिखित, आश्रम के वृक्षों से फल तोड़कर खाने [...]

- anshuman tiwari

आइये, चीन से लड़ते हैंकहां? डोकलाम पठार पर?नहीं. चावड़ी बाजार में.दुआ कीजिए कि भूटान के पठार पर चीन से दो-दो हाथ न हो (तनाव घटने लगा है) लेकिन चावड़ी बाजार में चीन से जंग करन [...]

- anshuman tiwari

ऑक्सीजन की कमीऑक्सीजन चाहिए तो सवालों को रोपते-उगाते रहिए.लोकतंत्र को ऑक्सीजन इसी हरियाली से मिलती है. सवाल जितने लहलहाएंगे, गहरे, घने और छतनार होते जाएंगे, लोकतंत् [...]

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अच्‍छे दिन ‘दिखाने’ की कल...

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पिछले दो-तीन वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था सचमुच गहरी मंदी का शिकार थी या हमारी पैमाइश ही गलत थी? अथवा नई सरकार ने सत्ता में आने के बाद पैमाइश का तरीका बदल दिया ताकि तस्वीर को बेहतर दिखाया जा सके? गनीमत है कि भारत में आम लोग आंकड़ों को नहीं समझते. राजनीति में कुछ भी कह कर बच निकलना संभव है और झूठ व सच को आंकड़ों में कसना टीवी बहसों का हिस्स [...]

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